अंधेरे में डूबी परिक्रमा… और सोता रहा सिस्टम
22 May 2026, 14:29
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Civic Issues
वृन्दावन | विकास अग्रवाल
इन दिनों अधिक मास के चलते धर्मनगरी वृन्दावन में आस्था का सैलाब उमड़ रहा है। हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन चारकोसीय परिक्रमा कर पुण्य लाभ ले रहे हैं। रात हो या दिन, महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे-छोटे बच्चे भगवान के नाम पर परिक्रमा मार्ग पर नंगे पांव चल रहे हैं। एक ओर पुलिस विभाग अपनी सीमाओं के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था संभालने में जुटा दिखाई दे रहा है। परिक्रमा मार्ग में गलियों के अनगिनत कट होने के कारण ई-रिक्शा और चौपहिया वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक पाना आसान नहीं है, फिर भी पुलिसकर्मी लगातार ड्यूटी निभा रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि आखिर परिक्रमा मार्ग को रोशनी देने की जिम्मेदारी किसकी है ? बीती रात अटल्ला चुंगी से लेकर रेलवे लाइन तक का पूरा परिक्रमा मार्ग रात्रि करीब दस बजे से घोर अंधेरे में डूबा रहा। रास्ते में चल रही करीब एक दर्ज़न से अधिक महिला श्रद्धालु चेतक पुलिसकर्मियों से डरते हुए पूछती नजर आईं— “सर, आगे बहुत अंधेरा है… परिक्रमा पूरी करें या वापस लौट जाएं?” पुलिसकर्मियों ने उन्हें भरोसा दिलाया— “आप निडर होकर परिक्रमा कीजिए, कोई दिक्कत हो तो तुरंत 112 पर कॉल करिए।” सोचिए, जिन महिलाओं और बच्चों को भगवान की नगरी में निर्भय होकर परिक्रमा करनी चाहिए थी, वे अंधेरे के भय में पुलिस से सुरक्षा मांगते दिखाई दिए। रात करीब तीन बजे विद्युत विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों SDO और JE से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन किसी ने फोन उठाना जरूरी नहीं समझा। जब पागलबाबा बिजली घर जाकर देखा गया तो वहां तैनात SSO साहब गहरी नींद में आराम फरमा रहे थे। शायद उन्हें यह भी जानकारी नहीं थी कि परिक्रमा का एक भाग अंधेरे में डूबा हुआ है। वहीं ड्यूटी पर मौजूद संविदाकर्मी लाइनमैन धर्मेन्द्र शर्मा उर्फ धर्मा ने अपने साथियों को बुलाकर फाल्ट ठीक कराने का प्रयास किया। फीडर नंबर दो का शटडाउन लेकर दो बार MCV उठाई गई, लेकिन लाइन चालू नहीं हो सकी। कारण साफ था। जिन कर्मचारियों के भरोसे हजारों श्रद्धालुओं की सुरक्षा छोड़ दी गई, उनके पास प्लास और पेचकस के अलावा कोई जरूरी उपकरण तक नहीं था। सबसे शर्मनाक बात यह रही कि सुबह आठ बजे तक भी लाइन चालू नहीं हो सकी थी। अब सवाल नगर निगम और विद्युत विभाग दोनों से है। क्या अधिक मास में करोड़ों रुपये के व्यवस्थाओं के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं ? क्या परिक्रमा मार्ग पर रोशनी जैसी बुनियादी व्यवस्था भी इन विभागों से नहीं संभल पा रही? क्या महिला श्रद्धालुओं और बच्चों की सुरक्षा सिर्फ भगवान भरोसे छोड़ दी गई है ? वृन्दावन में जगह-जगह ऐसी सोलर लाइटें चमक रही हैं जहां उनकी आवश्यकता नहीं है, लेकिन जहां हजारों श्रद्धालु पूरी रात गुजरते हैं, वहां अंधेरा पसरा हुआ है। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि आस्था के साथ खिलवाड़ है। प्रशासन को समझना होगा कि परिक्रमा मार्ग सिर्फ सड़क नहीं, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का मार्ग है। अगर इस पुरुषोत्तम मास में भी श्रद्धालुओं को अंधेरे में परिक्रमा करनी पड़े, तो फिर जिम्मेदार विभागों की मौजूदगी पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब भी समय है। नगर निगम और विद्युत विभाग के अधिकारी अपनी कुर्सियों से उठें, फाइलों से बाहर निकलें और परिक्रमा मार्ग को स्थायी रोशनी देने की व्यवस्था करें, ताकि वृन्दावन आने वाला श्रद्धालु यह महसूस कर सके कि यहां उसकी आस्था की सच में चिंता की जाती है।