धर्मनगरी के प्रमुख रेलवे स्टेशन मथुरा जंक्शन पर यात्रियों की हिफाजत को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। जेबकतरों से लेकर जहरखुरानों तक के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं। हालात यह हैं कि स्टेशन पर आने वाला यात्री इस बात को लेकर खौफजदा है कि न जाने कब उसकी जेब कट जाए या कब कोई शातिर उसे अपना शिकार बना ले। इसके बावजूद जीआरपी की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग रहे हैं।
ताजा मामला मध्य प्रदेश के सीहोर निवासी 75 वर्षीय श्यामा झबर मथुरा जंक्शन से अपने घर जाने के लिए 15 जून की शाम करीब 7 बजे स्टेशन पहुंची थीं। आरोप है कि स्टेशन परिसर में एक शातिर युवक ने खुद को विकलांग बताकर वृद्ध महिला को अपनी बातों में फंसा लिया।
युवक ने महिला से कहा कि वह भी भोपाल जा रहा है और विकलांग होने के कारण उसका टिकट नहीं लगता, इसलिए वह उसके साथ सफर कर सकती हैं। मदद का भरोसा देकर उसने वृद्ध महिला का विश्वास जीत लिया।
पीड़िता के मुताबिक, प्लेटफार्म नंबर-1 पर आरओ पानी की दुकान के पास वह युवक उसके साथ बैठ गया। महिला जब बाथरूम गई तो युवक वहीं मौजूद रहा। वापस आने के बाद महिला ने खाना खाया और मानवता दिखाते हुए उस युवक को भी खाना खिला दिया। इसी भरोसे का फायदा उठाकर कथित तौर पर युवक ने महिला को पानी पिलाया और बार-बार पानी पीने के लिए कहा।
आरोप है कि पानी पीने के कुछ देर बाद वृद्ध महिला को नींद के झोंके आने लगे। वह सबकुछ देख रही थी लेकिन विरोध करने की हालत में नहीं थी। इसी दौरान युवक ने उसका सामान खंगाला और ट्रेन आने पर उसे बैठाकर मौका पाकर फरार हो गया।
पीड़िता के अनुसार, युवक उसके कानों के सोने के कुंडल, पर्स में रखी सोने की चैन, दो सोने की अंगूठियां, चांदी की अंगूठी, करीब 5 हजार रुपये नकद, मोबाइल, तीन बैग और अन्य सामान लेकर चला गया। करीब 40 साल पुराने जेवरातों की कीमत लगभग 80 हजार रुपये बताई गई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्टेशन परिसर में खुलेआम घूम रहे ऐसे शातिर अपराधियों पर नजर रखने वाली जीआरपी आखिर कहां थी? क्या स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है? बुजुर्ग और अकेले यात्रियों को निशाना बनाने वाले अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं और पुलिस कार्रवाई के बजाय वारदात के बाद मुकदमे दर्ज करने तक सीमित दिखाई दे रही है।
पीड़िता ट्रेन में बेसुध हालत में पहुंच गई और उसे यह तक पता नहीं था कि वह किस ट्रेन में बैठी है। यात्रियों ने उसे ऊर्जाधानी एक्सप्रेस में सागर के पास पहचान कर मदद की। सागर जीआरपी ने महिला का इलाज कराया और परिजनों को सूचना दी। बाद में मामला मथुरा जीआरपी को ट्रांसफर किया गया, जहां वृद्ध महिला की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
अब सवाल यह है कि मथुरा जंक्शन पर यात्रियों की हिफाजत का जिम्मा संभालने वाली जीआरपी कब अपनी जिम्मेदारी का एहसास करेगी? आखिर कब तक बेबस यात्री अपराधियों का शिकार होते रहेंगे और पुलिस सिर्फ कार्रवाई का दावा करती रहेगी?