आस्था की नगरी वृन्दावन में श्रद्धालुओं की सुविधा के नाम पर संचालित पानीगांव कार पार्किंग अब गंभीर सवालों के घेरे में है। परिक्रमा मार्ग और यमुना पुल के निकट स्थित इस पार्किंग में मोटरसाइकिल पार्किंग शुल्क को लेकर विरोधाभासी तस्वीर सामने आई है। एक ओर दावा किया जा रहा है कि 4 घंटे के लिए निर्धारित शुल्क 20 रुपये है, वहीं दूसरी ओर पार्किंग से जारी पर्चियों पर 50 रुपये अंकित होने से पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि निर्धारित दर 20 रुपये है तो आखिर श्रद्धालुओं से किस आधार पर अधिक राशि ली जा रही है? और यदि 50 रुपये 24 घंटे का शुल्क है, तो मौके पर आने वाले वाहन चालकों को इसकी स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी जा रही? यही वह सवाल हैं जिनका जवाब जिम्मेदार विभागों को देना होगा।

इस पूरे मामले में जब पार्किंग संचालक धर्मवीर चौधरी से बात की गई तो उन्होंने स्पष्ट किया कि 'जज साहब' किसी व्यक्ति का नाम नहीं, बल्कि उनकी फर्म का नाम है। उनका कहना है कि पार्किंग पर्ची पर अंकित 50 रुपये 24 घंटे की पार्किंग का शुल्क है, न कि 12 घंटे का। इसके बावजूद मौके पर शुल्क वसूली और निर्धारित दरों को लेकर बनी असमंजस की स्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, इस पार्किंग का टेंडर मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण द्वारा दिया गया था। ऐसे में सबसे अहम सवाल यह है कि टेंडर की स्वीकृत शुल्क सूची क्या कहती है? क्या पार्किंग स्थल पर अधिकृत शुल्क सूची स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की गई है? यदि नहीं, तो यह पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।

सबसे बड़ी गवाह खुद पार्किंग की पर्चियां हैं। इन पर दर्ज 50 रुपये ने श्रद्धालुओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। यदि नियमों के अनुरूप सब कुछ हो रहा है तो फिर विवाद क्यों खड़ा हुआ? और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी?

अब निगाहें मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण और संबंधित अधिकारियों पर हैं। जरूरत इस बात की है कि वे सार्वजनिक रूप से स्वीकृत शुल्क दरें जारी करें, पार्किंग स्थल पर उन्हें स्पष्ट रूप से प्रदर्शित कराएं और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करें। आस्था के केंद्र वृन्दावन में श्रद्धालुओं के साथ शुल्क व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और नियमसम्मत होना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।