वृन्दावन में कथावाचक अनिरुद्धाचार्य के कथित बयान पर पत्रकारों का विरोध, थाना वृन्दावन में दी तहरीर
22 December 2025, 23:02
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Crime
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कथावाचक अनिरुद्धाचार्य उर्फ अनिल तिवारी द्वारा सार्वजनिक मंचों एवं सोशल मीडिया पर मीडियाकर्मियों के विरुद्ध कथित रूप से किए गए अपमानजनक, मानहानिकारक और विद्वेष फैलाने वाले वक्तव्यों को लेकर वृन्दावन के पत्रकारों में रोष व्याप्त है। इसी क्रम में पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने थाना वृन्दावन पहुंचकर प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार पाण्डेय को तहरीर सौंपते हुए प्राथमिकी दर्ज किए जाने की मांग की है।
पत्रकारों का आरोप है कि अनिरुद्धाचार्य उर्फ अनिल तिवारी निवासी गौरी गोपाल आश्रम द्वारा बार-बार मीडिया समुदाय के खिलाफ अत्यंत अशोभनीय, भ्रामक एवं भड़काऊ टिप्पणियां की जा रही हैं। आरोपों के अनुसार, कथावाचक ने मीडिया को “मंथरा”, “धृतराष्ट्र”, “मूर्ख” और “कुत्ता” जैसे शब्दों से संबोधित किया, जिसे पत्रकारों ने पूरे मीडिया समुदाय की सामूहिक मानहानि बताया है।
तहरीर में यह भी उल्लेख किया गया है कि कथित रूप से यह कहा गया कि “मीडिया मेरी हत्या करवा सकती है” तथा “पुलिस कह रही है कि मीडिया झूठ बोलती है”, जिससे मीडियाकर्मियों की सुरक्षा को लेकर भय का माहौल उत्पन्न हुआ है। पत्रकारों का कहना है कि ऐसे बयानों के बाद सोशल मीडिया पर आरोपित के अनुयायियों द्वारा मीडियाकर्मियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की जा रही हैं।
पत्रकारों ने यह भी आरोप लगाया कि कथावाचक द्वारा मीडिया को मैनेज करने और किसी तथाकथित मीडिया मंत्रालय अथवा संगठित षड्यंत्र के अस्तित्व की बातें कही जा रही हैं, जो पूर्णतः असत्य एवं भ्रामक हैं और समाज में अविश्वास व द्वेष फैलाने का कार्य करती हैं। उनका कहना है कि कुछ व्यक्तियों के कथित आचरण के आधार पर पूरे मीडिया समुदाय को अपराधी के रूप में प्रस्तुत करना संवैधानिक मूल्यों के विपरीत है।
तहरीर में कहा गया है कि यह पूरा मामला भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत मानहानि, आपराधिक धमकी, मिथ्या सूचना प्रसारण, लोक शांति भंग करने तथा विभिन्न वर्गों के बीच घृणा फैलाने जैसे अपराधों की श्रेणी में आता है। साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से किए जा रहे डिजिटल दुष्प्रचार को आईटी कानून के तहत भी दंडनीय बताया गया है।
पत्रकारों ने पुलिस से मांग की है कि उपलब्ध वीडियो, सोशल मीडिया लिंक एवं अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अनिरुद्धाचार्य उर्फ अनिल तिवारी के विरुद्ध संबंधित धाराओं में तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष विवेचना एवं कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति मीडिया या संवैधानिक संस्थाओं के विरुद्ध इस प्रकार के बयान देने का दुस्साहस न कर सके।