नववर्ष, वीआईपी और वृन्दावन पुलिस : आस्था के बीच व्यवस्था की असहायता
25 December 2025, 13:51
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Religious
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नव वर्ष 2026 दस्तक देने को तैयार है। इस अवसर पर देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु वृन्दावन पहुँचकर ठाकुर बांके बिहारी जी महाराज के दर्शन के साथ नए साल का शुभारंभ करना चाहते हैं। आस्था का यह सैलाबहर वर्ष उमड़ता है, लेकिन इसके साथ ही प्रशासन, विशेषकर वृन्दावन पुलिस के सामने चुनौतियों का पहाड़ भी खड़ा हो जाता है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच तमाम वीआईपी और प्रभावशाली लोग भी इसी दौरान वृन्दावन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहते हैं। यहीं से शुरू होती है पुलिस की असली परीक्षा। एक ओर लाखों आम श्रद्धालुओं की सुरक्षा, ट्रैफिक और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी, तो दूसरी ओर सीमित पुलिस बल के सहारे वीआईपी को विशेष, सुरक्षित और निर्बाध दर्शन कराना। यह संतुलन बनाना अब लगभग असंभव होता जा रहा है।
स्थिति यह है कि थाना वृन्दावन के सीयूजी नंबर पर आने वाली अधिकांश कॉल चार ही मांगों तक सिमट कर रह गई हैं—
किसी न किसी वीआईपी के लिए बांके बिहारी जी महाराज के विशेष दर्शन,
प्रेमानंद जी महाराज से एकांत वार्ता की व्यवस्था,
प्रमुख मार्गों पर लगे बैरियर से गाड़ी पास कराने का दबाव,
और गेस्ट हाउस में कमरा बुक कराने की “अनौपचारिक” अपेक्षा।
इन मांगों के बीच आम श्रद्धालु, अपराध नियंत्रण और नियमित पुलिसिंग कहीं पीछे छूट जाती है। वीआईपी ड्यूटी में उलझी पुलिस कई बार आपराधिक घटनाओं पर भी पूरी तरह फोकस नहीं कर पाती, जो आने वाले समय में गंभीर परिणाम दे सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कभी वृन्दावन जैसे अति संवेदनशील धार्मिक स्थल के लिए वीआईपी मूवमेंट हेतु अलग से विशेष पुलिस बल की व्यवस्था होगी? या फिर हर बार वही सीमित फोर्स, वही दबाव, वही समझौते चलते रहेंगे? यह समस्या किसी एक पर्व या नववर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वृन्दावन पुलिस की रोज़मर्रा की कहानी बन चुकी है।
अब यह केवल पुलिस की समस्या नहीं रही, यह प्रशासनिक इच्छाशक्ति का सवाल है। अगर समय रहते इस दर्द को नहीं समझा गया, तो आस्था, सुरक्षा और व्यवस्था तीनों ही खतरे में पड़ सकती हैं।