मथुरा में जमीन के एक सौदे से जुड़ा विवाद अब तीन अलग-अलग मुकदमों तक पहुंच गया है। एक ओर जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल, मारपीट और जान से मारने की धमकी के आरोप हैं, तो दूसरी ओर करोड़ों रुपये के जमीन सौदे में धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोप-प्रत्यारोप सामने आए हैं। इन मामलों में समाजवादी पार्टी की निवर्तमान महानगर अध्यक्ष के रूप में पहचानी जाने वाली ऋतु गोयल का नाम भी सामने आया है।
मथुरा के रिफाइनरी और महावन थाना क्षेत्रों में दर्ज इन मुकदमों में जमीन के सौदे से जुड़े लोगों के बीच गंभीर विवाद सामने आया है। हालांकि, तीनों मामलों में लगाए गए आरोपों की सत्यता का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगा।
पहला मामला : मथुरा के आजाद नगर निवासी मनीष आजाद की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे गए शिकायती पत्र के आधार पर थाना रिफाइनरी में ऋतु गोयल को नामजद करते हुए तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
शिकायत के अनुसार, 19 अगस्त को बरारी स्थित देवी मंदिर/हनुमान बगीची के निकट मनीष आजाद अपने साथी देवकीनंदन कश्यप के साथ मौजूद थे। आरोप है कि इसी दौरान वहां पहुंचीं ऋतु गोयल ने अपने साथियों को दोनों को अपने पास लाने का निर्देश दिया। मनीष का आरोप है कि उनके साथ मारपीट और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया तथा जान से मारने की नीयत से गले में पड़ी साफी से गला कसने का प्रयास किया गया।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपित पक्ष के साथियों ने हथियार दिखाकर धमकी दी। मनीष ने इससे पहले भी जातिसूचक शब्दों के प्रयोग और धमकियां दिए जाने की शिकायत का उल्लेख किया है। 17 अक्टूबर को दर्ज इस मुकदमे की जांच सीओ रिफाइनरी को सौंपी गई है।
दूसरा मामला जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़ा है। न्यायालय के आदेश पर थाना महावन में ऋतु गोयल के पति मनोज कुमार गोयल की शिकायत पर पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
मनोज गोयल के मुताबिक, मनीष आजाद और देवकीनंदन कश्यप ने जमीन का सौदा कराने के लिए उनसे संपर्क किया था। शिकायत के अनुसार, महावन क्षेत्र के जोगीपुर बांगर में 2,500 वर्गगज जमीन का सौदा 2 करोड़ 16 लाख 66 हजार रुपये में तय हुआ था।
मनोज का आरोप है कि जमीन के सौदे के सिलसिले में अलग-अलग तारीखों पर नकद रकम, चेक और ऑनलाइन भुगतान किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन की बिक्री की अनुमति से जुड़ी अड़चन सामने आने के बावजूद उनसे लगातार धनराशि ली गई। शिकायत में बनी सिंह और उनके पुत्र रोहित सहित संबंधित लोगों को अब तक लगभग 41 लाख रुपये दिए जाने का दावा किया गया है। इसमें जमीन के अग्रिम भुगतान और अन्य लेनदेन का विवरण भी दिया गया है।
तीसरा मामला : इसी विवाद में जमीन के मालिक बताए गए महावन निवासी बनी सिंह उर्फ बन्ने सिंह की ओर से भी शिकायत की गई। एसएसपी के आदेश पर थाना महावन में दो लोगों को नामजद करते हुए धोखाधड़ी, जालसाजी और जाली दस्तावेजों से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
बनी सिंह का आरोप है कि उन्होंने अपनी जमीन का सौदा ऋतु गोयल और उनके पति मनोज गोयल के साथ मनीष आजाद तथा देवकीनंदन कश्यप के माध्यम से तय किया था। उनके अनुसार, सौदे के तहत उन्हें केवल 14 लाख रुपये मिले और तीन लाख रुपये के चेक बाउंस हो गए।
बनी सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि जमीन के भुगतान को लेकर विवाद होने के बाद उनके खिलाफ झूठी शिकायत की गई। उनका दावा है कि जमीन पर कब्जे की नीयत से फर्जी स्टांप और नोटरी के माध्यम से 26 लाख रुपये के लेनदेन के दस्तावेज तैयार दिखाए गए। उन्होंने जमीन, बैंक खाते और अन्य दस्तावेजों के कथित दुरुपयोग का आरोप भी लगाया है।
इस प्रकार, जमीन के सौदे को लेकर दोनों पक्षों की ओर से परस्पर विरोधी आरोप लगाए गए हैं। एक पक्ष भुगतान और धोखाधड़ी का आरोप लगा रहा है, जबकि दूसरे पक्ष का दावा है कि उसके साथ भी भुगतान और दस्तावेजों को लेकर अनियमितता हुई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और अंतिम सत्यता अभी न्यायिक प्रक्रिया का विषय है।
इस पूरे प्रकरण में ऋतु गोयल का नाम सामने आने के कारण राजनीतिक पहलू भी चर्चा में है। उन्हें समाजवादी पार्टी की निवर्तमान महानगर अध्यक्ष के रूप में पहचाना जाता है। हालांकि, किसी पदाधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना अपने आप में अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।
अब निगाहें पुलिस की निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर हैं। क्या तीनों मुकदमों की जांच से जमीन के सौदे, कथित लेनदेन और जातिगत उत्पीड़न के आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो पाएगी? इसका जवाब जांच और अदालत के निष्कर्षों से ही मिलेगा।