परिक्रमा मार्ग में श्रद्धालु का मोबाइल झपटकर भागे बदमाश, CCTV में कैद हुई वारदात, लगातार बढ़ रही स्नैचिंग की घटनाओं से श्रद्धालुओं में खौफ

ठाकुर बांकेबिहारी की नगरी में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के दावों के बीच मोबाइल छिनैती की वारदातें लगातार पुलिस के लिए चुनौती बनती जा रही हैं। परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं के साथ हो रही स्नेचिंग की घटनाओं ने पुलिस की निगरानी और गश्त व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। हालात यह हैं कि मोबाइल छिनैती की एक वारदात का मुकदमा घटना के नौ दिन बाद दर्ज किया गया।

राया निवासी गजेन्द्र सिंह 27 अगस्त की शाम वृन्दावन परिक्रमा लगाने आए थे। रात करीब 10:25 बजे वह रमणरेती पुलिस चौकी से लगभग 100 मीटर पहले पहुंचे ही थे कि पीछे से लाल रंग की बाइक पर सवार दो युवक आए। बाइक पर पीछे बैठे युवक ने पीले रंग की टी-शर्ट पहन रखी थी। आरोप है कि उसने झपट्टा मारकर गजेन्द्र के हाथ से Vivo मोबाइल छीन लिया और दोनों बाइक से फरार हो गए।

पीड़ित के मुताबिक, वारदात के तत्काल बाद उसने शोर मचाते हुए रमणरेती चौकी पर मौजूद एक एसआई को घटना की जानकारी दी। एसआई ने स्थानीय लोगों के साथ बदमाशों का पीछा भी किया, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं लग सका।

इसके बाद पुलिस ने चौकी में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली, जिसमें रात करीब 10:27 बजे दोनों संदिग्ध रमणरेती चौकी से प्रेम मंदिर की तरफ भागते हुए दिखाई दिए। बावजूद इसके, पीड़ित को मुकदमा दर्ज कराने के लिए नौ दिन का इंतजार करना पड़ा। अब पुलिस ने तहरीर के आधार पर बीएनएस की धारा 304(2) के तहत अभियोग दर्ज किया है।

सवाल सिर्फ एक मुकदमे का नहीं, पुलिसिंग के तौर-तरीके का है

वृन्दावन में श्रद्धालुओं के मोबाइल और अन्य सामान पर झपट्टा मारने की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। परिक्रमा मार्ग, प्रमुख मंदिरों के आसपास और भीड़भाड़ वाले इलाकों में ऐसी वारदातों की शिकायतें सामने आती रहती हैं। सबसे गंभीर पहलू यह है कि हर पीड़ित पुलिस तक पहुंचे, यह जरूरी नहीं और जो पहुंचता है, उसे तत्काल न्याय की उम्मीद भी हमेशा पूरी होती नजर नहीं आती।

स्थानीय लोगों और पीड़ितों के बीच यह चर्चा भी आम है कि प्रभावशाली या ‘सोर्सफुल’ व्यक्ति की शिकायत को पुलिस ज्यादा गंभीरता से लेती है, जबकि आम श्रद्धालु शिकायत लेकर चौकी-दर-चौकी भटकता रह जाता है। हालांकि इस धारणा की स्वतंत्र पुष्टि किया जाना बाकी है, लेकिन पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।

वृन्दावन आने वाले श्रद्धालु पुलिस की मौजूदगी और सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा करते हैं। ऐसे में अगर परिक्रमा कर रहे श्रद्धालु के हाथ से मोबाइल चौकी से महज सौ मीटर की दूरी पर छिन जाए और मुकदमा नौ दिन बाद दर्ज हो, तो पुलिस की गश्त, निगरानी और त्वरित कार्रवाई के दावों पर सवाल उठना लाजिमी है।

अब देखना यह है कि CCTV फुटेज सामने होने के बावजूद पुलिस इन कथित स्नेचरों तक कब पहुंचती है और श्रद्धालुओं को लगातार निशाना बना रहे मोबाइल स्नेचिंग गिरोह पर कब प्रभावी शिकंजा कसती है।