बढ़ते अपराधों पर अंकुश लगाने और शहर की सुरक्षा-व्यवस्था को और पुख्ता करने की दिशा में वृन्दावन के थाना प्रभारी अश्वनी कुमार ने एक काबिल-ए-तारीफ पहल की है। उन्होंने थाना क्षेत्र के सभी चौकी प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने इलाकों में स्थानीय लोगों द्वारा सुरक्षा की नीयत से लगाए गए CCTV कैमरों की सूची तैयार कर उनकी पड़ताल करें।

निर्देशों के मुताबिक पुलिस यह भी सुनिश्चित करेगी कि क्षेत्र में लगे कैमरों में से कौन से कैमरे चालू हैं और कौन से बंद पड़े हैं। यानी अब महज कैमरा लगवा लेना काफी नहीं होगा, बल्कि उसकी कार्यशीलता भी जांची जाएगी।

दरअसल, आज के दौर में CCTV कैमरे अपराध की तफ्तीश में पुलिस के लिए किसी ‘तीसरी आंख’ से कम नहीं हैं। चोरी, लूट, मारपीट, वाहन चोरी अथवा किसी अन्य वारदात के बाद घटनास्थल के आसपास लगे कैमरों की फुटेज कई बार पुलिस को अपराधियों तक पहुंचाने में अहम सुराग देती है। लेकिन विडंबना यह है कि अनेक लोग कैमरे तो बड़े शौक अथवा टशन में लगवा लेते हैं, मगर उनकी नियमित मेंटेनेंस पर तवज्जो नहीं देते।

ऐसे में जब कोई वारदात उनके प्रतिष्ठान या घर के आसपास होती है और पुलिस CCTV फुटेज खंगालती है, तो पता चलता है कि कैमरा बंद है, DVR रिकॉर्डिंग नहीं कर रहा या कई दिनों से फुटेज सुरक्षित ही नहीं है। अपराध के बाद सामने आने वाली ऐसी लापरवाही कई बार तफ्तीश के लिए बड़ा रोड़ा बन जाती है।

थाना प्रभारी अश्वनी कुमार की यह पहल इसलिए अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे पुलिस के पास संभावित घटनास्थलों के आसपास उपलब्ध CCTV नेटवर्क की जानकारी रहेगी और जरूरत पड़ने पर फुटेज हासिल करने में वक्त जाया नहीं होगा। साथ ही कैमरा संचालकों को भी अपने सुरक्षा इंतजाम दुरुस्त रखने का एहसास होगा।

वृन्दावन जैसे धार्मिक नगरी में जहां रोजाना बड़ी तादाद में श्रद्धालु पहुंचते हैं, वहां मजबूत CCTV नेटवर्क अपराधियों के लिए खौफ और आमजन के लिए भरोसे का सबब बन सकता है।

थाना प्रभारी अश्वनी कुमार की पहल का असल मकसद भी यही है कि वारदात होने के बाद सुराग तलाशने के बजाय तकनीक की मदद से अपराधियों पर पहले से शिकंजा कसा जाए। अगर पुलिस की यह मुहिम जमीनी स्तर पर मुकम्मल तरीके से अमल में आती है, तो वृन्दावन की सुरक्षा-व्यवस्था को निश्चित तौर पर एक नई मजबूती मिल सकती है।