मकर संक्रांति पर श्री रंगनाथ मंदिर में हुआ गोदा–रंगमन्नार विवाहोत्सव, श्रद्धालु हुए भाव-विभोर
14 January 2026, 18:04
746 views
Religious
None | Exclusive Bulletin
दक्षिण भारतीय स्थापत्य शैली में वृन्दावन में निर्मित उत्तर भारत के विशालतम श्री रंगनाथ मंदिर में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर भगवान रंगनाथ और माता गोदा (लक्ष्मी स्वरूपा) का भव्य विवाहोत्सव वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। दो दिवसीय इस दिव्य आयोजन में मंदिर परिसर भक्तिरस और मंगल वैवाहिक वातावरण से सराबोर नजर आया।
बुधवार को आयोजन के दूसरे दिन माता गोदा जी का वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य अभिषेक किया गया। केसर मिश्रित हल्दी, चंदन से लेपन कर पवित्र नदियों के जल से सहस्त्रधारा अभिषेक हुआ। इसके पश्चात सुवासित तेल से केश विन्यास कर नवीन वस्त्र एवं आभूषण धारण कराए गए और कुंभ आरती संपन्न की गई। सायंकाल विवाह मंडप में भगवान रंगनाथ के साथ माता गोदा जी का विधिवत विवाह कराया गया।
श्री गोदा–रंगमन्नार विवाहोत्सव का आयोजन श्री वैष्णव परंपरा के अनुसार किया गया। वैदिक मंत्रों के बीच मांगलिक रस्में पूरी की गईं। विवाहोत्सव के अंतर्गत पुष्कर्णी द्वार के समीप माला अदला-बदली की रस्म विशेष आकर्षण का केंद्र रही। मंदिर के पुजारी नाचते-गाते माता गोदा जी की माला भगवान रंगनाथ के लिए तथा भगवान रंगनाथ की माला माता गोदा जी के लिए लेकर पहुंचे। यह क्रम तीन बार दोहराया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। इसके बाद भगवान रंगनाथ एवं माता गोदा जी की आरती कर उन्हें विवाह मंडप में ले जाया गया, जहां विवाहोत्सव संपन्न हुआ। विवाह अनुष्ठान राजू स्वामी द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कराया गया।
इससे पूर्व मंगलवार को माता गोदा जी अपनी सखियों को जगाने की परंपरा निभाने निकलीं। इसके बाद हल्दी और मेहंदी की रस्में संपन्न हुईं। मंदिर के महंत जी द्वारा भात की रस्म अदा की गई।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दक्षिण भारत के विल्लीपुत्तुर ग्राम निवासी भगवद भक्त विष्णुचित्त भट्ट नाथ स्वामी की पुत्री के रूप में अवतरित गोदा जी ने भगवान विष्णु को पति रूप में पाने के लिए पौष मास में धनु संक्रांति से मकर संक्रांति तक कठिन व्रत किया था। इस दौरान दिव्य प्रबंध पाठ के साथ तिरुप्पावे की रचना की गई। व्रत पूर्ण होने पर भगवान रंगनाथ ने भूदेवी अवतार गोदा जी को सहधर्मिणी रूप में स्वीकार किया। तभी से प्रत्येक वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर श्री रामानुज संप्रदाय के प्रमुख इस मंदिर में विवाहोत्सव का आयोजन होता है।
दो दिवसीय आयोजन के दौरान मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से भरा रहा और पूरे वातावरण में भक्ति, उल्लास और वैवाहिक मंगल की अनुभूति होती रही।