सस्ता जनता खाना गायब, महंगे खाने के भरोसे मजबूर यात्री
21 January 2026, 22:30
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आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर गरीब और आम यात्रियों के लिए शुरू की गई जनता खाना योजना अब सिर्फ कागजों में सिमटती नजर आ रही है। रेलवे द्वारा तय 15 रुपये में पेट भरने वाला सस्ता खाना अब स्टेशन के अधिकांश प्लेटफॉर्मों पर उपलब्ध ही नहीं है। नतीजा यह है कि जनरल कोच में सफर करने वाले यात्रियों को घंटों भूखे रहना पड़ता है या फिर मजबूरी में महंगा खाना खरीदना पड़ता है।
रेलवे बोर्ड के स्पष्ट निर्देश हैं कि स्टेशन पर 15 रुपये और ट्रेन में 20 रुपये में जनता खाना देना अनिवार्य है। इसमें 175 ग्राम पूड़ी, 150 ग्राम सब्जी और 15 ग्राम अचार दिया जाना चाहिए। इसके बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि स्टेशन के किसी भी स्टॉल पर यह खाना नियमित रूप से नहीं मिलता।
सबसे हैरानी की बात यह है कि जब भी रेलवे के अधिकारी निरीक्षण पर आते हैं, तभी अचानक जनता खाना दिखाई देने लगता है। अधिकारी जाते ही फिर से यह गायब हो जाता है। इससे साफ संकेत मिलता है कि ठेकेदारों और अधिकारियों के बीच मिलीभगत के चलते इस योजना को केवल दिखावे तक सीमित रखा गया है। रेलवे ने साफ निर्देश दिए हैं कि हर स्टॉल पर जनता खाना उपलब्ध हो और पैकेट पर बड़े अक्षरों में “जनता खाना” लिखा हो, ताकि यात्री भ्रमित न हों। लेकिन हकीकत में प्लेटफॉर्मों पर ऐसा कोई पैकेट दिखाई नहीं देता।
यात्रियों के अनुसार जनता खाना में पांच पूड़ी, आलू की सूखी सब्जी, अचार और एक हरी मिर्च मिलती है, जो 15 रुपये में भरपेट भोजन का सस्ता विकल्प है। लेकिन ठेकेदारों को इसमें मुनाफा कम दिखता है, इसलिए वे जानबूझकर इसे सीमित मात्रा में रखते हैं या फिर पूरी तरह बंद कर देते हैं। प्लेटफॉर्म नंबर एक और दो पर भी गिने-चुने स्टॉलों पर ही कभी-कभार जनता खाना मिलता है। बाकी जगह यात्रियों को 50 से 100 रुपये तक का महंगा खाना खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। कुल मिलाकर, गरीब यात्रियों के लिए शुरू की गई बहुचर्चित जनता खाना योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। यदि रेलवे प्रशासन ने इस पर सख्ती नहीं दिखाई, तो यह योजना केवल फाइलों और निरीक्षण तक ही सीमित रह जाएगी और आम आदमी सस्ते भोजन के अधिकार से वंचित होता रहेगा।