गिर्राज सेवा ट्रस्ट मामला : आध्यात्म के नाम पर करोड़ों का खेल? राधेश्याम शास्त्री पर गंभीर आरोप, ट्रस्ट ने खोला कथित षड्यंत्र का पिटारा
25 January 2026, 15:01
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Crime
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धर्म और आध्यात्म के मंच से प्रवचन देने वाले वृन्दावन निवासी कथावाचक राधेश्याम शास्त्री पर अब उन्हीं के सहयोग से बने सार्वजनिक ट्रस्ट की संपत्ति हड़पने और करोड़ों रुपये के कथित गबन के गंभीर आरोप न्यायालय में विचाराधीन हैं। श्री गिर्राज सेवा ट्रस्ट प्रकरण ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है, जहां ट्रस्ट प्रबंधन ने सीधे तौर पर राधेश्याम शास्त्री की नीयत पर सवाल खड़े किए हैं।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ओम प्रकाश डालमिया द्वारा 14 मई 2017 को थाना वृन्दावन में दर्ज कराए गए मुकदमे में राधेश्याम शास्त्री, उनकी पत्नी, उनके पुत्र गोपाल कृष्ण शर्मा और भाई लक्ष्मी नारायण शर्मा पर आईपीसी की 504, 506, 409, 419, 420, 465, 466, 467 व 468 जैसी संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज है। आरोप है कि ट्रस्ट की संपत्ति हड़पने की साजिश के तहत लगभग 1 करोड़ 10 लाख 40 हजार रुपये का कथित गबन किया गया।
शनिवार को वृन्दावन के एक होटल में आयोजित की गई प्रेस वार्ता में ट्रस्ट के अध्यक्ष भगवती प्रसाद केडिया ने दावा किया कि यह पूरा मामला एक सुनियोजित षड्यंत्र का परिणाम है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 में राधेश्याम शास्त्री की तथाकथित आध्यात्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए ट्रस्ट का गठन किया गया था, लेकिन जैसे-जैसे ट्रस्ट की ख्याति और संपत्ति बढ़ी, वैसे-वैसे राधेश्याम की कथित नीयत बदलती चली गई। श्री केडिया के अनुसार ट्रस्ट के कागजातों में कथित रूप से हेराफेरी कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और उन्हीं के आधार पर बैंक खातों से करोड़ों रुपये निकाल लिए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि राधेश्याम वास्तव में समाजसेवा के लिए समर्पित थे, तो ट्रस्ट के पैसों पर निजी नियंत्रण स्थापित करने की जरूरत क्यों पड़ी? इस प्रकरण में पुलिस जांच के दौरान राधेश्याम की पत्नी का नाम केस से हटाया गया, लेकिन राधेश्याम, उनके पुत्र और भाई आज भी आरोपी बने हुए हैं। मामला मथुरा न्यायालय में अभी भी विचाराधीन है। बताया गया है कि न्यायालय में इस केस की पहली सुनवाई 28 जनवरी 2021 को हुई थी और पिछली सुनवाई 6 नवंबर 2025 को। ट्रस्ट प्रबंधन के अनुसार राधेश्याम शास्त्री ने फिलहाल उच्च न्यायालय से गिरफ्तारी पर अरेस्टिंग स्टे ले रखा है। ट्रस्ट के अध्यक्ष ने विवेचना अधिकारी शुभांशु यादव द्वारा कराई गई फॉरेंसिक जांच का हवाला देते हुए कहा कि जांच रिपोर्ट में वादी के आरोपों को प्रथम दृष्टया सही माना गया है और इस संबंध में उच्च न्यायालय में शपथपत्र भी दाखिल किया जा चुका है। उन्होंने कहा है कि अब उनका मकसद किसी भी तरह का टकराव नहीं, बल्कि न्यायालय के फैसले की प्रतीक्षा करते हुए खरीदी गई भूमि पर गरीब, बेसहारा और जरूरतमंद लोगों के लिए अन्नक्षेत्र का संचालन करना है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आध्यात्म की आड़ में ट्रस्ट को निजी जागीर समझने वालों के खिलाफ वे आखिरी सांस तक कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। प्रेस वार्ता में ट्रस्ट के उपाध्यक्ष उमाशंकर शर्मा, संयुक्त सचिव हेमंत कुमार जैन, व्यवस्थापक केशव दत्त शर्मा आदि मौजूद रहे, जिन्होंने एक स्वर में मांग की कि मामले की निष्पक्ष सुनवाई हो और दोषियों को कानून के तहत सजा मिले।