मोबाइल चोरी से ज़्यादा तेज़ निकली फाइल की धूल, उदयपुर पुलिस ने 33 महीने बाद बढ़ाया 'न्याय' का कदम
25 January 2026, 22:46
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Crime
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राजस्थान के उदयपुर निवासी 65 वर्षीय देवीलाल शर्मा वृन्दावन आये थे ठाकुर बांके बिहारी के दर्शन करने, लेकिन लौटे तो जेब से मोबाइल गायब और सिस्टम से बस उम्मीद रह गई। 22 अप्रैल 2023 को विश्व विख्यात बांके बिहारी मंदिर में किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनकी जेब से Oppo A मोबाइल उड़ा लिया।
घटना के बाद देवीलाल शर्मा उदयपुर लौट गये और फिर शुरू हुआ वो सिलसिला, जिसमें उदयपुर पुलिस की भूमिका सबसे ज़्यादा सवालों में रही। पूरे 14 महीने बाद 29 जून 2024 को उन्होंने उदयपुर के थाना हिरणमगरी में तहरीर दी, लेकिन यहां से न्याय की गाड़ी पटरी पर आने के बजाय फाइलों के जाल में उलझ गई। सूत्रों के मुताबिक मुकदमा दर्ज करने के बजाय उदयपुर पुलिस ने तहरीर को घुमा फिराकर मथुरा एसएसपी कार्यालय भेज दिया, मानो चोरी का मोबाइल नहीं बल्कि जिम्मेदारी ही ट्रांसफर करनी हो।
नतीजा ये रहा कि चोरी 22 अप्रैल 2023 की, तहरीर 29 जून 2024 की और एफआईआर 33 महीने बाद, आज रविवार 25 जनवरी 2026 को जाकर थाना वृन्दावन में दर्ज हुई। थाना वृन्दावन के प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार पाण्डेय ने आईपीसी की धारा 379 के तहत मुकदमा पंजीकृत कर जांच बांके बिहारी पुलिस चौकी इंचार्ज शिव कुमार शर्मा को सौंप दी है। अब बड़ा सवाल यह है कि अगर उदयपुर पुलिस समय पर कार्रवाई करती, तो क्या मामला 3 साल की दहलीज तक पहुँचता? क्या न्याय के लिए उम्रदराज़ फरियादी को इतने लंबे इंतज़ार की सज़ा मिलनी चाहिए थी? इस पूरे मामले में उदयपुर पुलिस की सुस्ती और जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कहना गलत नहीं होगा कि मोबाइल चोरी से ज़्यादा चौंकाने वाली कहानी, शिकायत की यात्रा बन गई।