ग्राम सभा की जमीन और शिव मंदिर पर भूमाफिया का कब्जा, सैकड़ों लोगों ने एसडीएम से लगाई गुहार
29 January 2026, 07:45
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Crime
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तीर्थनगरी वृन्दावन में कथित भू-माफिया के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि अब सरकारी ग्राम सभा की भूमि ही नहीं, बल्कि धार्मिक स्थलों पर भी ताले जड़े जा रहे हैं। केशीघाट क्षेत्र स्थित चन्द्रसखी मोहल्ला के सैकड़ों लोगों ने बेगमपुर खादर की ग्राम सभा भूमि और शिव मंदिर पर कथित भू-माफिया द्वारा किए गए अवैध कब्जे को लेकर मांट के उप जिलाधिकारी को हस्ताक्षरयुक्त शिकायती पत्र सौंपकर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बेगमपुर खादर स्थित खाता संख्या 170 ग्राम सभा की सरकारी भूमि है, उस पर केशीघाट निवासी एक कथित भू-माफिया ने फर्जी दस्तावेजों और गलत तथ्यों के आधार पर अपना नाम दर्ज करा लिया। आरोप है कि यह सब सरकारी मशीनरी की मिलीभगत से किया गया, जिसके बाद परिक्रमा मार्ग से सटी भूमि पर अवैध कब्जा जमा लिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह व्यक्ति लंबे समय से वृन्दावन क्षेत्र में सक्रिय भू-माफिया के रूप में काम कर रहा है और पहले भी कई सरकारी कुंजों व सार्वजनिक भूमि को कब्जाने का प्रयास कर चुका है। अब आरोप है कि खसरा संख्या 170 की ग्राम सभा भूमि पर बने प्राचीन शिव मंदिर पर ताला लगाकर श्रद्धालुओं की आस्था को भी बंधक बना लिया गया है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि मंदिर से सटी सरकारी जमीन पर अवैध प्लॉटिंग कर कई प्लॉट बेच दिए गए हैं, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि पूरा मामला एक सुनियोजित भू-माफिया नेटवर्क का हिस्सा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार इस भू-माफिया के खिलाफ पूर्व में भी कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन हर बार मामले को दबा दिया गया। आरोप है कि दबंग भू-माफिया द्वारा शिकायत करने वालों को खुलेआम धमकाया जा रहा है कि यदि किसी ने उसके खिलाफ आवाज उठाई तो उसे फर्जी मुकदमों में फंसाकर जेल भेज दिया जाएगा। डर और दहशत के माहौल के चलते क्षेत्र के लोग लंबे समय से चुप थे, लेकिन अब सैकड़ों लोगों ने एकजुट होकर प्रशासन से मांग की है कि ग्राम सभा की भूमि को तत्काल कब्जामुक्त कराया जाए, अवैध बाउंड्रीवाल और गेट को ध्वस्त किया जाए तथा शिव मंदिर का ताला खुलवाकर धार्मिक गतिविधियां बहाल की जाएं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस कथित भू-माफिया के नेटवर्क को तोड़ने का साहस दिखाएगा या फिर वृन्दावन की सरकारी भूमि और धार्मिक स्थल यूं ही भू-माफियाओं की भेंट चढ़ते रहेंगे।