वृन्दावन में खुलेआम खूनी खेल, मथुरा गेट पुलिस चौकी के साये में चली बांक- सरिया
13 February 2026, 22:34
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Crime
वृन्दावन | विकास अग्रवाल
वृन्दावन में शुक्रवार सुबह अपराधियों ने कानून को ठेंगा दिखाते हुए दिनदहाड़े ऐसा खूनी तांडव मचाया, जिसने पुलिस व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। मथुरा गेट पुलिस चौकी से महज सौ मीटर की दूरी पर दबंगों ने एक व्यक्ति को घेरकर जानलेवा हमला कर दिया, लेकिन पुलिस मौके से नदारद रही।
गौतम पाड़ा निवासी रूपकिशोर गौतम के अनुसार उसका भाई राकेश गौतम अपने पुत्र दमन गौतम के साथ बुलेट मोटरसाइकिल से यजमानों को ठहराने के लिए मिर्जापुर धर्मशाला की ओर जा रहा था। तभी पलिया वाली धर्मशाला के पास पहले से शिकार की ताक में बैठे पूर्व सभासद प्रेमकिशोर उर्फ छोटे गौतम, उसके पुत्र राहुल, विनय, रोहताश, अभय व रिंकू तथा दो नकाबपोश युवक अचानक गली से निकल पड़े। आरोप है कि हमलावरों ने खून बहाने की पूरी तैयारी कर रखी थी। हाथों में सरिया, हथौड़ा, डंडा, बांक और चाकू लेकर उन्होंने राकेश और उसके बेटे को चारों ओर से घेर लिया। देखते ही देखते राकेश पर ताबड़तोड़ वार किए, उसे बेरहमी से पीटा और बांक से पैर पर वार किये गये। दमन भय के कारण किसी तरह मौत के मुंह से निकलकर दूर हट गया और पूरी वारदात का गवाह बना। शोर सुनकर जब स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे, तब आरोपी हथियार लहराते हुए, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियाँ देते हुए फरार हो गए। हैरानी की बात यह रही कि इतनी बड़ी वारदात के बावजूद मथुरा गेट पुलिस चौकी से कोई भी तत्काल मौके पर नहीं पहुंचा। पीड़ित पक्ष का कहना है कि 16 जनवरी को भी इन्हीं आरोपियों ने राकेश और उसके घर की महिलाओं को तमंचे की बट से पीटा था, जिसकी रिपोर्ट थाना वृन्दावन में दर्ज है। उसी पुरानी रंजिश का बदला लेने के लिए आरोपियों ने खुलेआम कहा कि “तेरी हिम्मत कैसे हुई हमारे खिलाफ रिपोर्ट करने की, आज तुझे जिंदा नहीं छोड़ेंगे।” गंभीर रूप से घायल राकेश को आनन-फानन में सौ शैय्या अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने हालत नाजुक देखते हुए उसे मथुरा रेफर कर दिया। सबसे बड़ा सवालहै कि जब पुलिस चौकी के बिल्कुल पास अपराधी बांक व सरिया लेकर सड़क पर खून बहा सकते हैं, तो आम आदमी खुद को सुरक्षित कैसे माने? क्या मथुरा गेट पुलिस चौकी केवल नाम की चौकी बनकर रह गई है? या फिर दबंगों के सामने कानून ने घुटने टेक दिए हैं? अब देखना यह है कि पुलिस इस मामले में सिर्फ फाइलों में कार्रवाई करेगी या फिर आरोपियों पर कानून का बुलडोजर चलाकर पीड़ित को इंसाफ दिलाएगी।