शादी के कुछ समय बाद से मायके में रह रही महिला के ससुराल पहुंचने पर ऐसा विवाद हुआ कि मामला थाने तक पहुंच गया। गणेश सिटी निवासी सतपाल सिंह यादव के पुत्र कुशल यादव की तहरीर पर थाना जैत पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ अभियोग दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कुशल यादव के अनुसार, उसका विवाह मेरठ निवासी खुशी यादव के साथ 2 फरवरी 2025 को वृन्दावन में हुआ था। विवाह के बाद खुशी अपने मायके में रहने लगी। परिवार की ओर से कई बार वापस बुलाए जाने के बावजूद उसके वापस नहीं आने की बात कही गई है।
सुबह-सुबह घर पहुंचा ‘काफिला’, शुरू हो गया विवाद
कुशल की तहरीर के मुताबिक 18 जून की सुबह करीब 8:30 बजे खुशी यादव, बानेश्वर यादव, मीना यादव, उसके चाचा जागेश्वर यादव और चचेरे भाई राजू यादव अचानक उसके घर पहुंच गए।
आरोप है कि घर में दाखिल होते ही गाली-गलौज और मारपीट शुरू कर दी गई। शिकायत में कहा गया है कि आरोपियों ने कुशल के पिता सत्यपाल सिंह यादव के साथ मारपीट करते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी।
सिर और कान पर चोट, अस्पताल में कराया उपचार
तहरीर में कुशल ने आरोप लगाया है कि राजू यादव और बानेश्वर यादव ने उसके माता-पिता के साथ मारपीट की। इस दौरान उसके पिता सत्यपाल सिंह यादव के सिर और कान पर चोटें आईं। इसके बाद उनका उपचार सीएचसी वृन्दावन में कराया गया।
CCTV भी निशाने पर? DVR के तार क्षतिग्रस्त करने का आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप घर में लगे CCTV कैमरों और DVR को लेकर है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि विवाद के दौरान आरोपियों ने CCTV कैमरों को तोड़ने का प्रयास किया और DVR के तार तक क्षतिग्रस्त कर दिए।
यदि पुलिस जांच में यह आरोप पुष्ट होता है तो घटना के दौरान मौजूद इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को नुकसान पहुंचाने का पहलू भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
पहले भी धमकी देने का आरोप
कुशल पक्ष का आरोप है कि यह पहली बार नहीं था। शिकायत में कहा गया है कि पूर्व में भी उक्त लोग घर पर आकर धमकी दे चुके हैं। पुलिस अब इस पुराने विवाद और कथित धमकियों की भी जांच कर सकती है।
पुलिस ने शुरू की विवेचना
कुशल यादव की तहरीर पर थाना जैत पुलिस ने अभियोग दर्ज कर लिया है। अब पुलिस घटनास्थल, मेडिकल रिपोर्ट, CCTV/DVR से संबंधित साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य उपलब्ध तथ्यों की जांच कर रही है।
हालांकि, मामले में लगाए गए आरोप अभी जांच के अधीन हैं। नामजद व्यक्तियों को दोषी नहीं माना जा सकता, जब तक आरोप न्यायिक प्रक्रिया में सिद्ध न हो जाएं। पुलिस विवेचना के बाद ही घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति और आरोपों की पुष्टि हो सकेगी।
सवाल यही है—अगर CCTV में घटना से जुड़े दृश्य सुरक्षित हैं तो जांच में वे कितनी अहम भूमिका निभाते हैं और पुलिस की विवेचना इस पूरे विवाद की असल तस्वीर कितनी जल्दी सामने लाती है?