मलूकदास जयंती महोत्सव में CM योगी का उद्बोधन : संत परंपरा से जागृत हुआ भारत, एकता में है शक्ति
7 April 2026, 22:10
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Religious
वृन्दावन | विकास अग्रवाल
श्रीमद् जगद्गुरु द्वाराचार्य मलूकदास जी महाराज की 452वीं जयंती के अवसर पर आयोजित महोत्सव में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संत परंपरा, सनातन संस्कृति और राष्ट्र चेतना पर विस्तृत उद्बोधन दिया। यह कार्यक्रम श्री सीताराम निकुंज अष्टयाम लीला महोत्सव के अंतर्गत आयोजित किया गया, जहां मुख्यमंत्री ने संत मलूकदास जी की समाधि पर दर्शन कर उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यकाल के अंधकारमय दौर में, जब विदेशी आक्रांताओं की क्रूरता से सनातन धर्म प्रभावित हो रहा था, तब संत मलूकदास जी ने एक दिव्य ज्योति बनकर जनचेतना को जागृत किया और संस्कृति राष्ट्रवाद की अवधारणा को पुनर्स्थापित किया। उन्होंने बताया कि संत का प्राकट्य प्रयागराज की पावन भूमि पर स्थित कड़ा धाम में हुआ, जो आज भी आध्यात्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में आयोजित होने वाला कुंभ मेला और महाकुंभ विश्व का सबसे बड़ा आध्यात्मिक समागम है, जहां करोड़ों श्रद्धालु एकत्रित होकर आस्था की डुबकी लगाते हैं। यह भारत की आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने संत परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि जगद्गुरु रामानन्दाचार्य ने समाज के हर वर्ग को जोड़ा और उनके शिष्यों में संत कबीर और संत रैदास जैसे महान संत शामिल रहे। इसी परंपरा में 22वीं पीढ़ी में मलूकदास जी का अवतरण हुआ, जिन्होंने मानवता, करुणा और सेवा को जीवन का मूल मंत्र बनाया। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने मुगल काल में भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और ‘राम’ को ही भारत का सच्चा राजा बताया। रामलीला जैसे आयोजनों के माध्यम से जनमानस को जोड़ने का कार्य भी उसी काल में प्रारंभ हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि संत मलूकदास जी ने ब्रज, अयोध्या, काशी और जगन्नाथपुरी जैसे तीर्थों में जाकर सांस्कृतिक चेतना का प्रसार किया। उन्होंने जीव मात्र के प्रति करुणा का संदेश देते हुए कहा कि अपना सा दुख सबका जाने और सबहिन के हम, सभी हमारे। जो आज भी समाज को दिशा देने वाले सूत्र हैं। प्रदेश सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि अयोध्या में 500 वर्षों के इंतजार के बाद भव्य राम मंदिर का निर्माण संभव हुआ, वहीं काशी विश्वनाथ धाम का कायाकल्प कर श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। उन्होंने कहा कि विकास और विरासत का संरक्षण साथ-साथ चल रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पहले अयोध्या में सीमित बिजली और अव्यवस्थित व्यवस्थाएं थीं, लेकिन आज यह नगरी त्रेता युग की अनुभूति कराती है। यह संतों के संघर्ष और एकता का परिणाम है। अंत में उन्होंने आह्वान किया कि सनातन समाज को बिना रुके, बिना डिगे और बिना थके ‘चरैवेति-चरैवेति’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ना होगा। व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्र और धर्म के हित में कार्य करना ही सच्ची साधना है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत-महात्मा, श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने संत परंपरा के इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।